Wednesday, November 28, 2007

ख्वाब

रात भर डूबता उगाता रहा इक ख्वाब
तुम्हारी आंखो से गिरा
merri पलकों पे सजा
raat भर दूधिया चाँदनी मेंघुलता रहा एक ख़वाब.....
पेड़ों के पीछे-चाँद के साथ साथ-बादलों के संग चलता रहा एक ख़वाब......
ओस से गिला ठंड में दुबकाsapano की चादर बुनता रहा एक ख़वाब.........

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